त्र से त्रिशूल.....

ननिहाल त्र कहे मेरे प्यारे बच्चों,अपने बारे में बताता हूँ,मैं हूँ एक संयुक्ताक्षर,ज्ञ के पहले आता हूँ,त् और र के मिलने से, मैंने अपना रूप है पाया,मुझे बहुत खुशी है कि,वर्णमाला ने मुझे अपनाया,त्रिनेत्र, त्रिशूल, त्रिपुरारी में मैं,मित्र, शत्रु में भी हूँ मैं,आप... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभाकर पाण्डेय
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[28 Feb 2010 06:26 AM]

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