संस्कृति मीमांसा में मेरी प्रेम कविताएँ
painting by alfred gokel,courtesy -google राजाराम भादू जी के संपादन में िनकल रही संस्कृति मीमांसा के जनवरी-फरवरी अंक में मेरी उन १०४ में से बारह कविताएँ चुनकर छापी हैं जॊ दरअसल मेरे प्रेम में टूटन के बाद दूसरे पक्ष की ऒर से हैं. छपने की कहानी जरा इस तरह...
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DUSHYANT
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[16 Feb 2010 02:59 AM]



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