मार्क्स, धर्म और ईश्वर के बीच

हथौड़ा मार्क्स ने कहा था धर्म अफीम है। लेनिन ने कहा था धर्म केवल एक निजी मामला नहीं है। आज हमारे बीच न मार्क्स हैं न लेनिन। मगर धर्म है। मार्क्स और लेनिन के सिद्धांत पुराने पड़ चुके हैं, मगर धर्म पुराना होकर भी खत्म नहीं हुआ। यह निरंतर फैल रहा है। या कहें हम... [पूरी पोस्ट]
writer अंशुमाली रस्तोगी

बीच बहस में

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[10 Feb 2010 02:13 AM]

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