महंगाई पीड़ित लेखक का ख़त!
सम्पादक महोदय,पिछले दिनों महंगाई पर आपके यहां काफी कुछ पढ़ा। कितने ही सम्पादकीयों में आपने इसका ज़िक्र किया। लोगों को बताया कि किस तरह सरिया, सब्ज़ी, सरसों का तेल सब महंगे हुए हैं और इस महंगाई से आम आदमी कितना परेशान है। ये सब छाप कर आपने जो हिम्मत दिखाई...
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नीरज बधवार
(हास्य-व्यंग्य)
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[13 Feb 2010 00:52 AM]



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