चरित्रहीन चप्पल!

vyanjana हिंदुस्तान में रहते हुए अगर आप रचनात्मक हो गए हैं तो इसे आपका दुस्साहस ही माना जाएगा वरना तो नई सोच पर हमारे यहां इतने पहरे हैं कि लकीर के प्रति फकीरी छोड़ना बेहद मुश्किल है। यही वजह है कि घटिया चुटकुलों, वाहियात फिल्मों, बेहूदा विज्ञापनों का हमारे यहां... [पूरी पोस्ट]
writer नीरज बधवार

(हास्य-व्यंग्य)

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[16 Feb 2010 11:07 AM]

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