परदे पर प्यार के यादगार लम्हें
हर दौर की अपनी एक प्रेम कहानी होती है. और हमें वे प्रेम कहानियाँ हमारी फ़िल्मों ने दी हैं. अगर मेरे पिता में थोड़े से ’बरसात की रात’ के भारत भूषण बसते हैं तो मेरे भीतर ’कभी हाँ कभी ना’ के शाहरुख़ की उलझन दिखाई देगी. हमने अपने नायक हमेशा चाहे सिनेमा से न...
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मिहिर
सिनेमाप्रेमfilms
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[15 Feb 2010 12:45 PM]



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