अब नहीं जलती लालटेन

balliabole उमेश चतुर्वेदीहम जैसे – जैसे एक उम्र की सीमा को पार करने लगते हैं, अपने पुराने दिन, घर-परिवार की बातें और स्कूल की शरारतें याद आने लगती हैं। भले ही किसी की उम्र ज्यादा क्यों न हो गई हो, उसकी मौत उसके साथ बिताए दिनों की बेसाख्ता याद दिलाने लगती है। अपने... [पूरी पोस्ट]
writer उमेश चतुर्वेदी
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[14 Feb 2010 01:36 AM]

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