शिवसेना की गुंडई के वक्त धमाके का मुफीद वक्त

और जाओ... जला कर राख कर दो वैशाली को इस आग में.... यूं, धमाकों को अहम या कम अहम धमाका तो नहीं कहा जा सकता लेकिन शनिवार को पूना में जर्मन बेकरी के बाहर हुआ धमाका ऐसा धमाका है जिसके बड़े मायने हैं। पिछले नवंबर में असम में भी धमाके हुए थे और इसमें कोई शक नहीं कि वो भी आतंकवादियों की ही करतूत थी। इस लिहाज से... [पूरी पोस्ट]
writer sushant jha
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[13 Feb 2010 11:58 AM]

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