छलक छलक जाएँ बदरा से रंग

मेरी कविताएँ [Meri Kavitayen] कई दिनों से धूल भरी आंधियां चल रही थीं.एक दम से गरमी बढ़ गयी थी लेकिन कल रात हुई बरखा रानी ने मौसम ही बदल दिया.सुबह भी बादल जैसे थे.भारत में होली का मौसम है ,माहोल है.मुझ से कल ही एक टिप्पणी में यह पूछा गया थाकि हम यहाँ कैसे होली मनाते हैं?तो.... यहाँ... [पूरी पोस्ट]
writer अल्पना वर्मा

poem

views
4
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
0
[28 Feb 2010 09:56 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix