कुमार विकल की कुछ कविताएँ
चम्बा की धूप--------ठहरो भाई,धूप अभी आएगीइतने आतुर क्यों होआखिर यह चम्बा की धूप है-एक पहाड़ी गाय-आराम से आएगी.यहीं कहीं चौगान में घास चरेगीगद्दी महिलाओं के संग सुस्ताएगीकिलकारी भरते बच्चों के संग खेलेगीरावी के पानी में तीर जाएगी.और खेलकूद के बादयह सूरज...
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Ek ziddi dhun
कुमार विकल
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[24 Feb 2010 00:22 AM]



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