महिला दिवस विशेष : दहलीज़ पर खडी एक लड़की
दरवाजे की दहलीज़ पर खडी एक लड़की सोच रही है। ' मैं लड़की हूँ 'इसमें मेरा क्या दोष है। मैं भी इस दहलीज़ के बाहर जाना चाहती हूँ। अपनी मंजिल को मैं भी पाना चाहती हूँ। फिर क्यों मुझे बाहर जाने से रोका जा रहा है। आखिर क्यों ? और किसलिए ?क्या सिर्फ इसलिए कि मैं...
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DONGRE तृष्णा
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[08 Mar 2010 03:42 AM]



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