महिला दिवस विशेष : दहलीज़ पर खडी एक लड़की

डोंगरे की डायरी दरवाजे की दहलीज़ पर खडी एक लड़की सोच रही है। ' मैं लड़की हूँ 'इसमें मेरा क्या दोष है। मैं भी इस दहलीज़ के बाहर जाना चाहती हूँ। अपनी मंजिल को मैं भी पाना चाहती हूँ। फिर क्यों मुझे बाहर जाने से रोका जा रहा है। आखिर क्यों ? और किसलिए ?क्या सिर्फ इसलिए कि मैं... [पूरी पोस्ट]
writer DONGRE तृष्णा
views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[08 Mar 2010 03:42 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix