प्रभाष जोशी के शोक में जश्न
आलोक तोमरहमारे समाज में एक परंपरा रही है कि घर का कोई बड़ा बूढ़ा संसार से चला जाता है तो उस साल कोई उत्सव नहीं मनाया जाता। एक साल का यह पारिवारिक शोक धार्मिक नहीं बल्कि आत्मीय रिवाज है। कहने की जरूरत नहीं कि प्रभाष जोशी हिंदी पत्रकारिता के सबसे बड़े और...
[पूरी पोस्ट]
विरोध
2
0
0
0
0
[16 Feb 2010 03:30 AM]



Shuffle








