एक मुट्ठी गुलाल आपके गाल
हृदयनारायण दीक्षितमनुष्य आदिम काल से आनंद का प्यासा है। प्रकृति आनंद से भरी-पूरी है। प्रकृति सुन्दर है, यहां रूप हैं, गुण हैं, गंध है, रंग हैं, स्वर हैं, रस हैं। समूचा जगत सौन्दर्य से भरा पूरा है। प्रकृति की हरेक गतिविधि नियमबद्ध है। सृष्टि कर्म भी...
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[28 Feb 2010 23:43 PM]



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