तू निर्बंध सारी धरती पर घूम सके
मनीषा की डायरी से यह एक पन्ना आज चुरा लाई हूँ ...एक भावुक ,रूमानी अन्दाज़ मे लिखी गई यह पोस्ट जाने क्यों आकर्षित कर गई।.जब "पा"देखी थी तो मन मे यही कामना की थी कि दुनिया की सब माएँ ऐसी ही हो जाएँ।और सब पिता .....उसने अपनी बेटी के लिए एक कविता लिखी थी।...
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सुजाता
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[20 Feb 2010 07:52 AM]



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