हमको अपनी मौहब्बत बना लीजिए
हमको अपनी मौहब्बत बना लीजिएमैं मुसाफ़िर हूँ एक भटका हुआअपने दिल में हमें अब पनाह दीजिएमैं करूँगा सदा आपका शुक्रियाअपनी पलकों में हमको बसा लीजिएहमको अपनी मौहब्बत बना लीजिए..इश्क़ में आपके हम तो पागल हुएअब ज़माने से हमको शिकायत नहींदेखने की अदा आपकी इस...
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Anurag Srivastava
मेरी कवितायें और गीत
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[16 Feb 2010 05:52 AM]



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