अमां आलोक मेहता जी ...बाशिंदे नई दुनिया के ...मगर सोच वही दकियानूसी . यार इत्ता अपने ब्लोग पर लिखा होता तो ..........

kuch bhi kabhi bhi हाल ही में होली में रंग गुलाल की गोली बम बारूद सभी बरसाने में लगे हुए थे । ऐसा लग रहा था कि जैसे हर किसीको ..हर किसी को बधाई देनी है ..सभी दे भी रहे थे ..मुझे तो लग रहा था कि पोस्टें हुलस हुलस के एक दूसरे से गलेमिल रही हैं और कह रही हैं ....अजी हमें पता... [पूरी पोस्ट]
writer अजय कुमार झा

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[02 Mar 2010 13:12 PM]

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