ब्लॉग दुर्बुद्धि जमात का कूड़ा-कचरा है...
जी हां ये उदगार होली से ठीक पहले नई दुनिया दिल्ली के संपादक श्री आलोक मेहता जी ने अपने एक आलेख में लिखे थे । हालांकि इसे उन्होंने बुरा न मानो होली है के बुलेट प्रूफ़ आवरण ओढा कर लिखा था । और बेशक किसी को लगा हो न हो मगर मुझे यदि बुरा न कहूं तो अच्छा भी...
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अजय कुमार झा
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[07 Mar 2010 04:54 AM]



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