दिल दे दिया है, जान भी देंगे, सब्जी नहीं लायेंगे सनम

ओशो चिन्‍तन अमृत साधनाअभी मैं टैक्सी में बैठकर आ रही थी, टैक्सी ड्राइवर ने रेडियो मिर्ची चला रखा था। दोपहर का वक्त था इसलिए पुराने गाने बज रहे थे। यह गाना सुना: "दिल दे दिया है, जान भी देंगे, दगा नहीं देंगेे सनम।' मुझे हंसी आ गई। यह गाना कम से कम तीस साल पुराना... [पूरी पोस्ट]
writer राजेंद्र त्‍यागी

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[16 Feb 2010 17:30 PM]

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