दुख की ईंटें हटाकर सुख की ईंटें रखिये

ओशो चिन्‍तन आज तक का समाज दुख से भरा हुआ समाज है, उसकी ईंट ही दुख की है, उसकी बुनियाद ही दुख की है। और जब दुखी समाज होगा तो समाज में हिंसा होगी, क्योंकि दुखी आदमी हिंसा करेगा। और जब समाज दुखी होगा और जीवन दुखी होगा तो आदमी क्रोधी होगा, दुखी आदमी क्रोध करेगा। और जब... [पूरी पोस्ट]
writer राजेंद्र त्‍यागी

चिन्‍तन

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[20 Feb 2010 17:30 PM]

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