कहीं शेर-ओ-नग़मा बन के....तलत साहब की आवाज़ में एक दुर्लभ गैर फ़िल्मी गज़ल

आवाज़ ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 360/2010/60 'दस महकती ग़ज़लें और एक मख़मली आवाज़', तलत महमूद पर केन्द्रित इस ख़ास पेशकश की अंतिम कड़ी में आपका फिर एक बार हम स्वागत करते हैं। दोस्तों, किसी भी इंसान की जो जड़ें होती हैं, वो इतने मज़बूत होती हैं, कि ज़िंदगी में एक... [पूरी पोस्ट]
writer सजीव सारथी

sujooi chatterjee

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[01 Mar 2010 08:52 AM]

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