छम छम नाचत आई बहार....एक ऐसा मधुर गीत जिसे सुनकर कोई भी झूम उठे

आवाज़ ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 366/2010/66 "एक बार फिर बसंत जवान हो गया,जग सारा वृंदावन धाम हो गया,आम बौराई रहा, सरसों भी फूल रहा,खेत खलिहान शृंगार हो गया,पिया के हाथ दुल्हन शृंगार कर रही,आज धूप धरती से प्यार कर रही,बल, सुंदरता के आगे बेकार हो गया,सृष्टि पे यौवन... [पूरी पोस्ट]
writer सजीव सारथी

sujooi chatterjee

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[07 Mar 2010 08:00 AM]

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