होली : हम - तुम
पाँच छोटी शीर्षकहीन कवितायें*गुझिया मेंयह जो भर गई है मिठासइसका उत्स है तुम्हारे ही आसपास। * * आज से शुरु हो गया है मेरा अवकाश आज से बढ़ गया है तुम्हारा काम आज बहुत देर तक पढ़ता रहा नज़ीर और निज़ार। याद आता रहा ताज याद आती रही रेतीले बगूलों की कतार। तुम्हीं...
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sidheshwer
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[26 Feb 2010 11:44 AM]



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