दिन : वे दिन , ये दिन ( बरास्ता निर्मल वर्मा के शीर्षक)
आज सुबह - सुबह निर्मल जी की याद आ गई - निर्मल वर्मा (३ अप्रैल १९२९- २५ अक्तूबर २००५) की। यह शायद इसलिए हुआ हो कि बहुत दिनों से उन पर लिखना टल रहा है। लिखना, मतलब लिखना । अपने पेशे की माँग और पुर्ति के बीच संतुलन साधने की कवायद में बहुत कुछ लिखा है उनके...
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sidheshwer
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[04 Mar 2010 05:09 AM]



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