यात्रा के पहले काम का एक दिन

अनवरत सुबह शेव बना कर दफ्तर में आ बैठा था। सुबह से कोहरा और बादल थे तो रोशनी की कमी ने दुपहर चढ़ने का अहसास ही समाप्त कर दिया। काम और आगंतुकों में ऐसा फँसा कि 12 बजे के पहले उठ नहीं सका। आगंतुकों के उठते ही ने उलाहना दिया -आज नहीं नहाना क्या?  मैं तुरंत... [पूरी पोस्ट]
writer दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

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[13 Feb 2010 08:46 AM]

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