आपाधापी-अवरोध और हॉर्न

अनवरत दो दिनों से कुछ भी लिखने को मन नहीं किया। होली सर पर आ गई और दोनों बच्चे घर में नहीं। मन कुछ तो उदास होना ही था। पूर्वा बिटिया आ रही है यह सोच कर मन उद्विग्न भी था। आज रात वह कोटा पहुँच गई। उस की ट्रेन बीस मिनट लेट थी। हम स्टेशन पहुँच कर उस की प्रतीक्षा... [पूरी पोस्ट]
writer दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

यातायात

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[26 Feb 2010 13:53 PM]

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