होली के पहले की एक रंगभरी शाम

अनवरत आज मिलादुन्नबी का त्यौहार था। बहुतों के साथ ही मेरे लिए भी होली के पहले एक दिन और अवकाश का। इस्लाम के अनुयायियों के लिए उतना ही बड़ा दिन जितना शायद कृष्ण जन्माष्टमी या क्रिसमस है। बिटिया दीपावली के बाद अब घर आई है तो घर ही रहा। कुछ साल पहले तक मुहल्ले... [पूरी पोस्ट]
writer दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

व्यंग्य

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[27 Feb 2010 14:05 PM]

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