खिन्नता यहाँ से उपजती है

अनवरत दो दिन कुछ काम की अधिकता और कुछ देश की न्याय व्यवस्था से उत्पन्न मन की खिन्नता ने  न केवल अनवरत पर अनुपस्थिति दर्ज कराई, पठन कर्म भी नाम मात्र का हुआ।  मैं भी इस न्याय व्यवस्था का ही एक अंग हूँ। अधिक खिन्नता का कारण भी यही है कि देश की ध्वस्त... [पूरी पोस्ट]
writer दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

justice

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[05 Mar 2010 11:59 AM]

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