खुशी, जो मिलती है आभासी के वास्तविक होने पर

अनवरत कल रात मैं भोजन कर निपटा ही था कि मोबाइल घनघना उठा। जहाँ मैं था वहाँ सिग्नल कमजोर होने से आवाज स्पष्ट नहीं आती। मैं ने मोबाइल उठाया तो नमस्ते के बाद कहा गया कि मैं रतलाम से .......... बोल रहा हूँ। नाम स्पष्ट समझ नहीं आया। बाद में संदेश था कि वे सुबह... [पूरी पोस्ट]
writer दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi

मंसूरअली हाशमी

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[07 Mar 2010 14:17 PM]

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