और एक हुसैन.........
और एक हुसैन......... दिनेशराय द्विवेदीएक हुसैन ठेला घसीटता है और पहुँचाता है सामान, जरुरत मंदों तक एक हुसैन सुबह-सुबह म्युनिसिपैलिटी की गाड़ी आने के पहले कचरे में से बीनता है काम की चीजें अपनी रोटी के जुगाड़ने कोएक हुसैन भिश्ती दोपहर...
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दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
poetry
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[07 Mar 2010 23:42 PM]



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