तो फर्क बचा क्या गली के आशिक और तेरे दीवाने में

दर्पण के टुकड़े वापिस लौट जा ऐ राही या राह बदल ले फिर कोईशायद कुछ भी हासिल ना हो तुझ को मेरे वीराने मेंतेरा मिलना तय था बेशक जीवन के इस सफर में लेकिनतेरा बिछुड़ना सोचा तक नही हमने जाने अनजाने मेंकुछ भी मुमकिन नजर तुझे नही आता अपनी कहानी मेंपर कुछ भी नामुमकिन सा नही ऐ... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[10 Feb 2010 02:52 AM]

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