हुस्न की वो मल्लिका है और वो भी पूरे शवाव पे है

दर्पण के टुकड़े माना ये कि पास में उसके दौलत-ऐ हुस्न अपार हैपर काम किसी के ना आये तो सब दौलत बेकार हैहुस्न की वो मल्लिका है और वो भी पूरे शबाब पे हैहम है किस गिनती में उसके चाहने वाले हजार हैछूने से उसको डरते है मर ही ना हम जाए कहींजब देखने भर से ही उसको इश्क का चढा... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[12 Feb 2010 04:08 AM]

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