क्यों होता है ऐसा क्यों होता है

दर्पण के टुकड़े क्यों होता है ऐसा ऐसा क्यों होता हैजरा सा दे कर के चाहते हैं एहसान बड़ा हो जाएचंद ईंटो और पत्थरों से कोई ताज खड़ा हो जाएहींग लगी ना फिटकरी और रंग भी चोखा आयेसब क्यों ऐसा चाहते है कि ऐसा गधा मिल जायेवजन तो पूरा ढोए लेकिन घास जरा ना खाए ऐसा भला कहाँ होता है... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
views
2
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[19 Feb 2010 01:04 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix