ऐ मेरे खुदा इतना भी ना दे जितनी मेरी औकात नही

दर्पण के टुकड़े सब से सुन्दर फूल है जो इस दुनिया के गुलशन का अर्थी पे वो आके चढ़े ये तो कोई अच्छी बात नही वो कोहीनूर का हीरा है किसी ताज पे ही शोभा देगा फकीर की झोली पड़ा रहे ये तो कोई अच्छी बात नही रानी महारानी बनने का अधिकार जिसे कुदरत ने दिया महलों की जगह खंडहर में... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[14 Feb 2010 04:29 AM]

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