वो मेरे करीब इतना आई मै समझा सब कुछ सुलझ गया

दर्पण के टुकड़े जो होना था जो होता है आखिरकार तो वो ही हुआवो अपनी राह में चली गयी मै अपनी राह पे चता गयाइक बार कहा था उसने हमें जो होगा दोनों निपट लेंगेबिंदास जियो और खुल के जीयो हैं साथ तो सबसे निपट लेंगेवो मेरे करीब इतना आई मै समझा सब कुछ सुलझ गयाअहसास हुआ छोटेपन का... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[20 Feb 2010 06:08 AM]

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