अब तक तो दर्पण टूटा था कोई अक्स भी आज तो तोड़ गया

दर्पण के टुकड़े अब तक तो दर्पण टूटा था कोई अक्स भी आज तो तोड़ गया पहले छूटे रिश्ते नाते लेकिन इक साया साथ में था जाने कहाँ हम से चूक हुई साया भी साथ को छोड़ गया पहले भी जख्म मिले हैं बहुत पर वक्त ने उनको भर डाला नासूर से भी ज्यादा गहरा कोई जख्म वो दिल पे छोड़ गया वो पल पल... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[21 Feb 2010 08:13 AM]

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