तुम पहले दोस्त बनी होती तो बात ही कुछ और होती

दर्पण के टुकड़े तुम पहले दोस्त बनी होती तो बात ही कुछ और होती कुछ पहले और मिली होती तो बात ही कुछ और होती ये सूरज पहले निकल आता मेरे दिन कुछ और हुए होते ये चांदनी पहले खिली होती तो रात ही कुछ और होती ता उम्र अकेले तन्हा ही मै यहाँ वहां भटका ही किया तेरा साथ मिला होता... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[22 Feb 2010 08:45 AM]

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