गंगा खुद नाले में गिर जाए तो नाला क्या करे

दर्पण के टुकड़े मंजिले सब से जुदा हैं रास्ते भी हैं जुदाहमसफर कोई ना बने तो फिर मुसाफिर क्या करेनाले का गंगा में मिलने का तो कोई हक़ नहीपर गंगा खुद नाले में मिल जाए तो नाला क्या करेआग लगने से बचा रखा था सूखी घास कोचिंगारी कोई डाले तो घास ना जले तो क्या करेसाजे दिल के... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[27 Feb 2010 05:27 AM]

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