दर्पण के टुकड़े

दर्पण के टुकड़े संभल संभल के अनजानी राहों में चलना होता हैलौट के वापिस आ पाना वरना मुश्किल होता है पूरा कर सकते ही नहीं वो ख़्वाब किसीको मत दिखलाख़्वाब टूट जाने का गम यारा बहुत बुरा होता हैजब साथ निभाने की दिल में ना चाहत है ही हिम्मततो बात बात में हाथ पकड़ने से फिर यारा... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[01 Mar 2010 02:29 AM]

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