या तो अब तुझ संग जीना है या फिर तुझ संग ही है मरना

दर्पण के टुकड़े प्यार तेरा नफरत में बदल जाए वो काम नही करना अपनी खुशी के लिए यासा किसीका दामन गम से क्या भरना हमको तो आदत है यूं भी प्यासा जीते जाने की दो घूँट पानी के लिए किसी कूए को जूठा क्या करना ये होठो तक की प्यास नहीं दिल भी प्यासा मन भी प्यासा ये प्यास किसी से... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[02 Mar 2010 01:39 AM]

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