जो प्यार किताबी रह जाए उस प्यार नहीं मै कह सकता

दर्पण के टुकड़े जो यार के काम ना आये कभी उसे यार नही मै कह सकता जो प्यार किताबी रह जाए उस प्यार नही मै कह सकता सह सकता हूँ दुःख गम या तकलीफ चाहे जितनी भी हो बस खुशी मुझे कोई दे जाए तो थोड़ी भी नही सह सकता जुबां पे कुछ और दिल में कुछ ये रीत है दुनिया वालो की लो तुम ही... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[06 Mar 2010 05:46 AM]

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