जब प्यासा मरना किस्मत है तो नदी किनारे क्या मरना
हसरत मार के जीना है तो तेरा साथ भी क्या करना खुद भी परेशां क्या होना,तुझ को भी परेशां क्या करना दामन फटा ही रहना है तो रफुगर कोई मिला ना मिलाजब चाक गरेबां सीना नहीं तो सुई या धागा क्या करना बून्द बून्द को तरसा दे उस जल के स्त्रोत से क्या हासिलवो नदिया हो...
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Krishan lal "krishan"
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[06 Mar 2010 02:22 AM]



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