इसके बाद शायद ना लिखु शायद ना लिख पाऊं
इसके बाद शायद ना लिखु शायद ना लिख पाऊंसोचा चलते चलते आखिरी रचना लिखता जाउंअपने अपने मापदण्ड खुद बना लिये है सबनेऔर उन्ही मापदण्डो पे औरो को लगते कसने अच्छे बुरे की परिभाषा कुछ ऐसी सब ने बनायी जो बात लगी अच्छी खुद को उसमे ही दिखी अच्छाईअपनी गलती नज़र नही...
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Krishan lal "krishan"
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[06 Mar 2010 07:19 AM]



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