रे माधो, तू देखना,
रे माधो, तू देखना,इक दिन ,मैं इस चाँद का,एक टुकडा तोड़ कर,तेरे माटी के,दिए में पिघलाऊंगा ॥रे माधो, तू देखना,इक दिन,इन तारों को,बुहार कर एक साथ,रगडूंगा, तेरे आँगन में,आतिशबाजी , करवाउंगा मैं॥रे माधो, तू देखना,इक दिन,तू नहीं जायेगा,पंचायत में हाजिरी...
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अजय कुमार झा
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[03 Mar 2010 11:02 AM]



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