सुकून
ना किसी डाकिये की ज़रूरत हैना कबूतर की मेरे पंख हैं ना !उड़कर आना अपनी चोंच में दबे शब्दतुम्हारी मेज पर रखनासुकून देता हैऔर अगली लम्बी उड़ान कीप्रबल इच्छा होती है...
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रश्मि प्रभा...
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[18 Feb 2010 03:03 AM]



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