बिन मांगे मोती मिले

हँसते रहो   Hanste Raho ***राजीव तनेजा***      "बात सर के ऊपर से निकले जा रही थी...कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर!...माजरा क्या है?" जिस बीवी को मैँ कभी फूटी आँख नहीं सुहाया,वो ही मुझ पर दिन पर दिन मेहरबान हुए जा रही थी। दिमाग पे बहुत जोर डालने... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव तनेजा

rajivtaneja

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[13 Feb 2010 23:58 PM]

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