आओ हंस लें....... भला मानो होली है

चौखट दुविधा ही दुविधा उन्‍हें जो चश्‍मे बद्दूरबिन चश्‍में रहता नहीं है चेहरे का नूरजब चश्‍मा हो नाक पर बरसे रंग हजारकुछ भी तो दिखता नहीं शीशों के उस पारक्रोधित हों या जतलाएं मुस्‍काकर के प्‍यारनर था ये कोई सांड सा या थी कमसिन नार दिखने में बाधा करे होली पर हर... [पूरी पोस्ट]
writer पवन *चंदन*

सांड चश्‍मा चश्‍मे-बद्दूर

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[01 Mar 2010 03:10 AM]

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