राह में बिछी हैं पलकें आओ ..........
चार दिन हुए हैं फ़क़त यूं लगे है उम्र बीती आओ सखी मिल भी जाओ ज़िन्दगी तुम बिन है रीतीसब कुछ तो है ..... तुम चार दिन को नहीं तो गोया कुछ भी नहीं .......... आ जाओ ........ आ जाओ राह में बिछी हैं पलकें आओ .............ये आवाज़, ये अंदाज़ ........... सुनिए...
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अमिताभ मीत
बस यूँ ही
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[13 Feb 2010 23:07 PM]



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