कभी मुझे एक शख्स मिला था
यही शाख़ तुम जिस के नीचे किसी के लिए चश्म-ए-नम हो यहाँ अब से कुछ साल पहले मुझे एक शख्स मिला था जिसे मैं ने आग़ोश में ले के पूछा था - मेरी जान !!क्यों खड़ी रो रही हो ?मुझे अपनी बोसीदा आंचल में फूल के गहने दिखा कर उस ने कहा था - मेरा साथी उधर - उस ने उंगली...
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अमिताभ मीत
मेरा ईमान
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[15 Feb 2010 21:17 PM]



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