१५ अगस्त : वसीम बरेलवी
पिछले दिनों तबीयत काफ़ी नासाज़ थी और मैं अस्पताल में था ... क़रीब १५ दिन.उसी दौरान न जाने कब की पढ़ी वसीम बरेलवी साहब की एक नज़्म याद आयी. मैं ने जब ये नज़्म पढ़ी थी तो मुझे बेहद अच्छी लगी थी ये नज़्म. घर आ के इसे पढने की कोशिश की है. सुनें न सुनें, इस नज़्म को...
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अमिताभ मीत
वसीम बरेलवी
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[20 Feb 2010 10:46 AM]



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