बारह बजे लेट नहीं, चार बजे भेंट नहीं

दिल से दिल की बात इस बार पटना से वापसी में अकेला ही था। हावड़ा-जम्मूतवी हिमगिरि एक्सप्रेस से लखनऊ तक आना था। सफर दिन का था और मैं अकेले ही था, सो सहयात्रियों से बातचीत शुरू हो गई। सहयात्रियों में पटना सचिवालय में कार्यरत दो बड़े अधिकारी थे। इनमें से एक अपनी बिटिया को बैंक... [पूरी पोस्ट]
writer manglam

सोचें तो सही

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[20 Feb 2010 15:24 PM]

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